भगवान परशुराम कौन थे? क्यों अपनी ही माता का वध किया परशुरामजी ने ? किसने विवश किया परशुराम को अपनी ही माता का वध करने के लिए?

परशुराम जी भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। वे त्रेतायुग  ऋषि जमदग्नि और देवी रेणुका के यहाँ जन्में थे। परशुराम विष्णु जी के उग्र अवतार  है। परशुराम से बड़े उनके चार भाई थे। परशुरामजी माता-पिता के सबसे छोटी संतान थे और बहुत ही आज्ञाकारी थे |

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप हुआ। ऋषि जमदग्नि की पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इन्दौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत पर परशुरामजी का जन्म हुआ।

महाभारत और विष्णुपुराण के अनुसार परशुराम जी का मूल नाम राम था। पितामह भृगु द्वारा नामकरण संस्कार कर इनका नाम ‘राम’ रखा गया। किन्तु जब भगवान शिव ने उन्हें अपना ‘परशु’ नामक अस्त्र प्रदान किया, तो परशु धारण करने से उनका नाम परशुराम हो गया। ऋषि जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य भी कहलाए।

शस्त्रविद्या के महान गुरु परशुराम

परशुरामजी शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। परशुराम भीष्म, द्रोण और कर्ण सदृश महान महापराक्रमी योद्धाओ के गुरु थे। वे पुरुषों के लिये आजीवन एक पत्नीव्रत के पक्षधर थे।

परशुराम को भगवान श्रीहरि का आवेशावतार भी कहा जाता है। क्रोधित स्वभाव और पितृ भक्ति के कारण एक दिन उन्होंने आवेश में अपनी ही माता का वध कर दिया था।

क्यों परशुरामजी के पिता ने उन्हें उनकी ही माता का मस्तक काटने का आदेश दिया?

एक दिन उनके पिता जमदग्नि ने उनकी माता  रेणुका से पास के जंगल से हवन के लिए लकड़ी लेकर आने को कहा पर वो यज्ञ का समय बीतने के बाद आयी | जब ऋषि जमदग्नि ने उनकी देरी से आने का कारण पूछा, इसपर रेणुका झूठ बोली। रेणुका ने कहा, की उन्हें यज्ञ के लिए लकड़ियां नहीं मिली और वो गलती से बहुत आगे चली गयी |

जबकि सत्य यह था कि रेणुका (परशुरामजी की माता) गन्धर्वराज चित्ररथ को अप्सराओं के साथ विहार करता देख  आसक्त हो गयी। वो गन्धर्वो और अप्सराओं की जलक्रीड़ा देखने लगी और समय का पता नहीं लगा |  

जमदग्नि बहुत तपस्वी थे, उन्होंने अपनी दिव्यदृष्टि से पत्नी के देरी का कारण जान लिया | हवन काल बीत जाने और अपनी पत्नी के झूठ बोलने से क्रुद्ध ऋषि जमदग्नि ने अपनी पत्नी को मानसिक व्यभिचार करने का अपराधी माना। ऋषि ने अपने सभी पुत्रों को माता रेणुका का वध करने की आज्ञा दी।

किन्तु परशुरामजी के भाई माता का वध का दुःसाहस नहीं कर पाए, जबकि जब पिता ने परशुराम से कहा के अपनी माता के साथ अपने भाइयों का सिर भी काट दो। परशुरामजी ने बिना विलंब किये, पिता की आज्ञा का अनुसरण किया और अपनी माता और भाईयों का वध कर दिया।

पिता जमदग्नि परशुरामजी के पितृ भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए और परशुराम से कहा की पुत्र तुम कोई वरदान मांगो | तब परशुराम ने  उनकी माँ और सभी भाई जीवित हो जाए और उनको इस बात का स्मरण ना रहे की उनका मैंने सिर काटा था | ऋषि जमदग्नि ने सभी को पुनर्जीवित कर दिया और परशुरामजी के माता और भाई सभी जीवित हो गये और उनकी वध संबंधी स्मृति नष्ट हो गई और सब कुछ पूर्ववत हो गया।

कैसे मिली परशुरामजी को मातृ हत्या के पाप से मुक्ति?

वैसे तो परशुरामजी ने अपनी माँ रेणुका को पुनर्जीवित तो करा लिया था, किंतु उनपर मातृ हत्या का पाप लग चुका था। इससे पाप से मुक्ति पाने हेतु परशुरामजी ने मातृकुण्डिया, चित्तौरगढ़ में जाकर भगवान शिवजी की घोर तपस्या  और तब उनको माता की हत्या के पाप से मुक्ति मिली |

धन्यवाद,

अभिज्ञा

 

 

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