भाई दूज/ भाई पोटा/ यम-भरत द्वितीया कैसे मनाए, क्यों मनाए, कथा और फल

भाई-बहन के पावन प्रेम का प्रतीकात्मक पर्व है भाई दूज। इस दिन बहनें भाई का तिलक करती है और अपने प्रिय भाई को हाथों से भोजन कराती हैं। इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है ऐसी मान्यता है। इस पावन पर्व का महत्व इस प्रकार है :

  • भाईदूज के दिन भाई, बहेन के घर का ही खाना खाए। ऐसा करने से भाई की आयु मे वृद्धि होती है।
  • आज के दिन बहनों को अपने भाई का तिलक करके तीन बार आरती जरूर करनी चाहिए।
  • कार्तिक शुक्ल द्वितीया को प्राचीन काल में यमुनाजी ने अपने भाई यमराज को विधिवत पूजन अपने घर भोजन कराया था, इसलिए यह ‘यमद्वितीया’ कहलाती है। इस दिन बहन के घर भोजन करना आयुवर्धक, स्वास्थ्य वर्धक, पुष्टिवर्धक और समृद्धि वर्धक बताया गया है।
  • बहनों को इस दिन वस्त्र और आभूषण का उपहार देने चाहिए। यमद्वितीया तिथि को जो भी भाई बहन के हाथ से इस पृथ्वीलोक में भोजन करता है, वह सर्वोत्तम रत्न, धन और धान्य पाता है ।
  • पहला कौर बहन के हाथ से खाएं। स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ से भोजन करता है, उसे धन समृद्धि, सम्पदा और दीर्घायु प्राप्त होता है।
  • जिनकी बहन न हो, वो रिश्ते की बहन मौसी/ मामा/ फूफी की पुत्री को बहन मान लें या मुंह बोली बहन बनाए।
  • नारदपुराणानुसार :

“ऊर्ज्जशुक्लद्वितीयायां यमो यमुनया पुरा ।।

भोजितः स्वगृहे तेन द्वितीयैषा यमाह्वया ।।

पुष्टिप्रवर्द्धनं चात्र भगिन्या भोजनं गृहे ।।

वस्त्रालंकारपूर्वं तु तस्मै देयमतः परम् ।।

यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः संभोजितो निजकरात्स्वसृसौहृदेन ।।

तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्ति प्राप्नोति रत्नधनधान्यमनुत्तमं सः ।।“

  • अगर मुंह बोली बहन या रिश्ते की बहन भी नहीं हो तो किसी गाय या नदी को ही बहन बना लें और उसके पास भोजन करे। अर्थात सारांश यह है की भाई दूज (यमद्वितीया) को कभी भी पुरुषों को अपने घर भोजन नहीं करना चाहिए।
  •  भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को और भाई अपनी बहनों को कोई न कोई उपहार जरूर दे। वस्त्र या आभूषण उपहार स्वरूप देने का भी रिवाज है।
  • स्कंदपुराण के अनुसार आज के दिन भाई-बहन का यमुना नदी में नहाना भी बहुत शुभ होता है।
  • कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना जी में स्नान करने वाला पुरुष यमलोक का दर्शन नहीं करता।

कथा और पौराणिक तथ्य

सूर्य की पत्नी संज्ञा से दो संताने थी। पुत्र का नाम यमराज और पुत्री का नाम यमुना था। पत्नी संज्ञा  पति सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर, सूर्य ही अपने दोनों संतानों पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहाँ से चली गई। छाया को यम और यमुना से अत्यधिक स्नेह नहीं था। किंतु यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह रखती  थीं।

यमुना अपने भाई यमराज के यहां प्राय: जाती और उनके सुख-दुख की बातें पूछा करती और तथा यमुना, यमराज को अपने घर पर आने के लिए भी आमंत्रित करतीं, किंतु यम स्थिति अपनी बहन उसके घर न जा पाते थे।

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर हाल जानने को गये। बहन यमुना की आनंद की सीमा ना रही, यमुना के आंखों से खुशी से अश्रु धारा बहने लगी। बहन यमुना ने अपने भाई का बहुत आदर-सत्कार किया। यमुना ने अनेकों प्रकार के व्यंजन बनाए और उन्हें भोजन कराया तथा तिलक लगाया।

यमराज ने चलते वक्त बहन यमुना से मनवांछित वरदान मांगने को कहा।

यमुना ने कहा कि यदि आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यह वचन दीजिए कि प्रत्येक वर्ष आप मेरे यहां आज के दिन आया करेंगे। इसी प्रकार भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे। बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया।

इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाये, उसे मृत्यु का  भय न रहे। इसी के साथ उन्होंने यह भी वरदान दिया कि यदि इस दिन भाई-बहन यमुना नदी में डुबकी लगाएंगे तो वे यमराज के प्रकोप से बचेंगें। यमुना को यमराज ने वचन दिया और तथास्तु कहकर लौट गये। तब से इस दिन भाई दूज का पावन पर्व मनाया जाने लगा।

  • कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन बहन यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। तब यमराज ने प्रसन्न होकर उसे यह वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा।
  • यमराज मृत्यु के देवता हैं और यम की बहन हैं यमुना नदी। यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और यमुना और यमराज की पूजा करने का बहुत ही बडा़ माहात्म्य माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र के लिए यमराज से प्रार्थना करती है।
  • स्कंदपुराणनुसार इस दिन यमराज को प्रसन्न करने से पूजन करने वालों को दीर्घायु, धन-समृद्धि ,  यश और मनोवांछित फल मिलता है।

कैसे करें पूजन

भाई की दीर्घायु के लिए यमराज से प्रार्थना करें

  • सर्वप्रथम भाई-बहन दोनों मिलकर यम, यमुना और चित्रगुप्त की विधिवत पूजा करें तथा सभी को अर्घ्य दें।
  • प्रार्थना करें कि पृथ्वी के आठ चिरंजीवी पुरुषों मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा की तरह मेरे भाई भी चिरंजीवी हो जाए।
  • इसके बाद भाई को भोजन कराते हैं। तत्पश्चात भाई को बहनें तिलक करती हैं। इसके बाद भाई को यथाशक्ति बहन को भेंट देना चाहिए। भेंट स्वरूप स्वर्ण, आभूषण, वस्त्र आदि दें।
  • मान्यता है कि इस दिन बहन के हाथ से भाई को भोजन कराने से भाई की उम्र बढ़ती है और उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उनके जीवन की परेशानियां कम होती है।

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