स्वास्थ्य, भोजन और जीवनशैली से जुड़े जरूरी बातें, जाने हिंदी में/ Health, diet and lifestyle related important facts in hindi

स्वास्थ्य, भोजन और जीवनशैली से जुड़े जरूरी बातें, जाने हिंदी में/ Health, diet and lifestyle related important facts in hindi

“पथ्याशी व्यायामी स्त्रीषु जितात्मा नरो न रोगी स्यात्”

मतलब उपरोक्त पंक्ति में पूरे स्वास्थ्य का सार है, खाने-पीने में नियम से चलने वाला, प्रतिदिन व्यायाम (exercise) करने वाला, भोग-विलास में संयम रखने वाले लोग कभी बीमार नहीं होते।

गलत भोजन, व्यायाम (Exercise) में लापरवाही और गलत व्यसन , यही वे मूल बातें हैं जिसका अनुसरण नहीं करने के कारण भारत रोगियों का घर बन रहा है। अस्पताल कुकुरमुत्ते की तरह (mushrooming) बढ़ रहें हैं और राकेट की स्पीड से अस्पतालों का बिजनेस। हमारी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा डाक्टरों और हास्पिटल को भेंट चढ़ रहा है।

  1. गलत भोजन या खाने में दोष

हम आटे की रोटी या चावल-दाल क्यों खाते हैं? दूध,दही या छाछ क्यों पीते हैं? फल  या सब्जियों के क्या गुण होते हैं? पिज्जा, बर्गर, पास्ता हमें क्यों आकर्षित करता है? जवाब है, हमारे घर में सभी खाते हैं इसलिए खाते हैं या हमें इसका स्वाद पसंद है या फिर हमारे पेट इसी से भरते हैं। पर हम जब ये सब खाते हैं तो ये नहीं जानते की किसी भी अच्छे या बुरे भोजन का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ना ही यह जानने की हमारी इच्छा होती है।

हेल्दी खाने की अनदेखी कर हम अपनी थाली में स्वादिष्ट और गरिष्ठ भोजन को जगह दें रहे हैं। घर के खाने के जगह जोमैटो कर के खाने को तवज्जो देने की संस्कृति हमारे स्वास्थ्य का डरावने स्तर तक नुकसान कर रहा है।

प्री-स्कूल के बच्चों के आंखों पर झूलते चश्मे पढा़कू होने की नहीं, गिरते स्तर की स्वास्थ्य की निशानी है। बच्चों का खेलने में या पढा़ई में मन ना लगना, थकान और वयस्कों में थकान, कमजोरी, संतानोत्पत्ति में मुश्किलें और समय से पहले बुढ़ापा ये सब हमारी बदलती रहन-सहन और गलत भोजन की ही परिणाम है।

आज दूध का स्थान चाय-काफी, कोल्ड ड्रिंक्स ने, चपाती का स्थान मैदे का ब्रेड, पिज्जा, मोमोज ने ले लिया है। सिगरेट, तंबाकू और शराब को हमारे आदर्श (Role model) अमिताभ, सलमान, शाहरुख या रणवीर प्रचार कर एंड्रॉर्स कर रहें हैं तो इसका सेवन तो बस हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हो जाता है।

किंतु गलत खाऩपान और आदतें ना सिर्फ हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि निर्बल और रोगी पीढ़ी का भी निर्माण करती है।

2. व्यायाम नहीं करना

हमारे शरीर में बढ़ते तकलीफों का कारण हमारी बदलती  जीवनशैली और एक्सरसाइज (व्यायाम) नहीं करना होता है। यह विषय इतनी गहरी है कि इस पर एक किताब भी लिखऩा कम है। इसलिए यह विशेष सलाह नयी पीढ़ी को है कि सुखी जीवन के लिए आलस को छोड़कर सैर और एक्सरसाइज को प्रतिदिन की दिनचर्या (Routine) में शामिल करें।

आराम पसंद जीवन तो सभी चाहते हैं, किन्तु आलसी लोगों के शरीर में खाया भोजन और उसकी कैलोरी फैट मे बदल जाती हैं।

और यही मोटापा हजारों बीमारियों का कारण बनता है। शारीरिक शक्ति, चुस्ती और मनोबल की कमी होती है। फलस्वरूप आत्मविश्वास और धैर्य की कमी होती होता है।

3. स्वास्थ्य और भोग-विलास, दुर्व्यसन और सयंम

बीमारी या गिरते स्वास्थ्य की एक मुख्य कारण व्यवहारिक विसंगतियां भी होती हैं। बच्चों या वयस्कों में टीवी मोबाइल देखते हुए खाना, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक बेकाबू होकर खाना और टीवी  और इंटरनेट के माध्यम से हिंसक और गलत  का फिल्मों, प्रोग्राम देखने और विसंगतियों मे पड़ने से भी स्वास्थ्य की हानि होती है।

स्वास्थ्य संबंधी विषय में गंभीरता और सुधार हर उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। बच्चे, बूढ़े या जवान सभी के लिए उम्र के अनुसार खाना, बैलेंस और हेल्दी डाइट बहुत ही महत्वपूर्ण है।

पुराने समय में लोगों के पास सुविधाओं की कमी थी, पर सीमित संसाधनों का वे भरपूर उपयोग करते थें। वहीं आज  ट्रांसपोर्ट और टेक्नोलॉजी के विकास से देश-विदेश के फल, सब्जी या अन्य खाद्य पदार्थ साल भर उपलब्ध रहते हैं। किंतु ज्ञान और सजगता की कमी से लोग इसका सही उपयोग नहीं कर पाते।

आयुर्वेद के अनुसार दूध, छाछ, मक्खन, गुड़, हरे शाक-सब्जी, दाल, फल (गन्ने, सेव, आम, पपीता आदि), सूखे मेवे (बादाम, किशमिश, काजू, पिस्ता, खजूर आदि) , मधु, आवंला, हरड़, सोंठ, गेहूं और पुराने चावल का सेवन स्वास्थ्य वर्द्धक होता  ऐसा जरूरी नहीं है कि, अच्छे स्वास्थ्य या शारीरिक बनावट को पाने के लिए महंगे फल, मेवे या महंगे फिटनेस क्लास की मेंबरशिप ही जरूरी है। बल्कि जरूरी यह है कि हम अपने खाऩपान, दिनचर्या और आदतों को लेकर सजग रहें और इसमें संयम और सुधार लाएं।

आदतें जो आज ही बदलना जरूरी है

  • मौसमी सब्जियों और फलों को खाना कोल्ड स्टोरेज की बेमौसमी खाद्य पदार्थों से हजारों गुणा बेहतर होता है।
  • शक्कर के जगह गुड़ को खाने में प्रयोग करें।
  • बाजार की चटपटी स्नैक्स  या खाने के बजाय घर का साफ और हेल्दी खाना खाए।
  • अपने रसोई से पैक्ड स्नैक्स जैसे मैगी, पास्ता, मैदे के नूडल्स को निकाल बाहर करें और बच्चों को घरेलू स्नैक्स मसलन मठरी, गुझिया, लड्डू, पोहे, उपमा आदि खाने की आदत डालें।
  • दाल, राजमा, लोबिया, सोयाबीन सरीखे उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री को भोजन में शामिल करें।
  • अत्यधिक ठंडी (बर्फ, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक)  या अधिक गर्म पेय जैसे चाय, काफी का ज्यादा सेवन से पाचनतंत्र (digestive system) को हानि पहुंचती है। इसका कम से कम सेवन करें।
  • जब जरूरी हो तभी ही वाहनों का इस्तेमाल करें, कोशिश करें पैदल चलने की। घर के काम में भागीदारी रखें।
  • दिनचर्या (daily routine) सही करें – भागदौड़ की जीवनशैली, प्रोफेशनल लाइफ का दबाव (stress) अन्य हजारों उलझने हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रही है। इस प्रकार के  तनाव तो हमारे जीवन का हिस्सा है, किंही वाहनों तु सही डाइट के साथ आसन, प्राणायाम,  योग और  मेडिटेशन आदि को दिनचर्या (Routine) में शामिल करके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दुरूस्त करें।
  • पर्याप्त नींद लेंः व्यस्त और बदलती जीवनशैली में लोग सबसे ज्यादा नींद की अनदेखी करते हैं। कम नींद और असमय सोना जल्दी बुढ़ापे (Early aging) को न्योता देता है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) लेने से हम तरोताजा महसूस करते हैं और हमें मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को भी मिलती है। साथ ही हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • “Early to bed and early to rise.

Makes a man healthy, wealthy and wise”.

यह अंग्रेजी की प्रसिद्ध कहावत है जिसका हमारे जीवन में विशेष महत्व है। जो लोग समय पर सोते और जागते हैं वह स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान होते ही हैं। कोशिश करें की रात को जल्दी सोए और सूर्योदय के बाद नहीं सोए । ना तो अधिक सोये, ना ही कम। जल्दी उठने से शुद्ध हवा मिलती है, हम ज्यादा एक्टिव रहते हैं।

  • संतुलित और समय पर भोजन करने का नियम बनाए। क्या, कब और और कितना खाना है इस का भी नियम पोषण को ध्यान में रखकर चार्ट बनाए। ना ही ज्यादा देर तक भूखे रहे और एक साथ ज्यादा भोजन  करने की आदत से ना। रखें । फलों, सूखे मेवे और हरी सब्जियों को भी अपने खानपान में शामिल करें । 

“Our body is made of what we have eaten and drink”

भोजन हमारे शरीर मैं ऊर्जा और गर्मी उत्पन्न करने के अतिरिक्त शरीर का निर्माण करता है हमारे शरीर के टूटे कोशिकाओं का निर्माण और रक्त भी बढ़ाता है। हमारे शरीर की बनावट, कार्य क्षमता और विकास सब हमारे भोजन पर निर्भर करता है।

  • किसी नियम और रुटिन पर सही तरीक़े से चलने के लिए हमें ज्ञान होना चाहिए की, किस अवस्था में कौन सा भोजन क्या लाभ हानि पहुंचाने वाला है? कब, क्या और कैसे खाए यह एक गंभीर विषय है।
  • करीबन 90% लोगों में रोग और परेशानी का कारण खाने पीने में लापरवाही और अज्ञानता होती है। अतः अपने डाइट, लाइफ स्टाइल और व्यवहार को लेकर सजग रहें।
  • समय-समय पर (विशेषकर 40 की उम्र) के बाद अपना नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें हाई ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज, यूरिन और कालेस्ट्राल आदि की जांच कराते रहें।

स्वास्थ्य और डाइट के विषय को गंभीरता से लें और अपने सेहत का ख्याल रखें। अच्छा स्वास्थ्य हमारे व्यक्तित्व और प्रोफेशनल जीवन में विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। एक अस्वस्थ व्यक्ति डिग्री रखकर या कुशाग्र होते हुए भी साधारण व्यक्ति से पिछड़ जाता है। योग्यता के अनुसार कभी सफल नहीं हो पाता और नकारात्मकता या अवसाद से घिर जाता है।

अच्छा स्वास्थ्य जीवन के सफलता की कुंजी होती है, इसलिए स्वस्थ रहें और मस्त रहें।

स्वास्थ्य से जुड़ी और भी जानकारी हम अपने ब्लॉग के जरिए आपसे शेयर करते रहेंगे।

जय हिन्द

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