कामिका एकादशी कथा, पूजन विधि और पूजा-व्रत फल

कामिका एकादशी कथा

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। ब्रह्मांड पुराण वर्णित कथानुसार राजा हरिश्चन्द्र बड़े ही महान, सत्यनिष्ठ और दृढ़व्रती थे। राजा हरिश्चंद्र को अपने जीवनकाल में अपनी सत्यनिष्ठता के कारण अनेक प्रकार कष्ट उठाने पड़े। हरिश्चन्द्र को अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को भी अपने प्रण के कारण बेचना पड़ा। हरिश्चंद्र को अपने परिवार का विरह झेलना पड़ा और वे एक चांडाल के हाथ में बिके और वहीं उसके घर में रहने लगे। किंतु वो सर्वथा चिंता ग्रस्त रहते कि, क्या कारण है जो मुझे ऐसे संकट झेलने पड़ रहे हैं।

एक दिन हरिशचन्द्र की भेंट एक सिद्ध मुनि से हुई। राजा हरिश्चंद्र ने मुनि से अपनी व्यथा का वृतांत कहा। सिद्ध मुनि ने हरिश्चन्द्र को भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत करने को कहा। मुनि के कथनानुसार, हरिश्चन्द्र ने अजा एकादशी व्रत विधिवत किया, तत्पश्चात राजा हरिश्चंद्र के संपूर्ण कष्टों का नाश हुआ। राजा अपनी पत्नी और पुत्र से पुनः मिलें और उन्हें उनके राज्य की प्राप्ति हुई। और अंत समय में स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई।

कामिका एकादशी पूजन विधि

कामिका एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नानादि निवृत्ति के बाद, पूजा स्थल को स्वच्छ करके संकल्प करें। भगवान विष्णु के चित्र या प्रतिमा का पूजन करें। फिर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, दूध, पंचामृत, नैवेद्य आदि  अर्पित करके निर्जल या फलाहार करना चाहिए।

साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो वासुदेवाय नमः” मंत्र का जप करके भक्ति भाव से श्रीहरि का स्मरण और स्तुति करना चाहिए। यथाशक्ति में गरीबों को भोजन और दक्षिणा देकर,  द्वादशी को पारण करना चाहिए। इस प्रकार विधिवत सद्भाव और भक्ति से कामिका एकादशी व्रत से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं और सर्वमनोकामना सिद्ध करते हैं।

क्यों और कैसे करना चाहिए कामिका एकादशी व्रत?

  • मान्यता है की कामिका एकादशी के दिन विधिपूर्वक व्रत करने और श्री हरि भगवान विष्णु की  पूजा-अर्चना करने से  जाने-अनजाने में हुए सभी  पापों का नाश होता है  और  सर्व मनोकामना पूर्ण होती है।
  • एकादशी को भक्तजन भगवान विष्णु की पीले वस्त्र, पीले कपड़े बिछी  चौकी, पीले फूल, पीले रंग की मिष्ठान और पीली  पूजन सामग्री से पूजा अर्चना करे, इससे प्रभु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की  सर्वमनोकामना पूर्ण करते हैं ।
  • एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु को गाय के दूध की खीर में तुलसी के पत्ते डाल कर भोग लगाने से घर में शांति बनी रहती है।
  • कामिका एकादशी की सुबह स्नानादि से निवृत्त होने कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर श्रीहरि  विष्णु का  केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से श्री हरि की कृपा बरसती है।
  •  एकादशी के दिन शुद्ध तन-मन से श्रीमद् भागवत पाठ या तुलसी की माला से “ॐ नमो वासुदेवाय नमः” का जाप करने से घर में सुख-शांति आती है और वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है।
  • धन प्राप्ति इच्छुक व्रती  को कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी की भी पूजा-अर्चना से अक्षय धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
  • तुलसी दल से श्रीहरि विष्णु के पूजन सभी पाप का नाश होता है। मान्यता है श्रीहरि रत्न, मोती, आभूषण से नहीं प्रेम से तुलसी दल अर्पण से प्रसन्न होते हैं।
  • दक्षिणावर्ती शंख से श्री हरि और माता लक्ष्मी के पूजन से धन लाभ होता है।

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