सेहत का खजाना मखाना रोजाना क्यों चाहिए खाना Benefits of Makhana in Hindi

व्रत-उपवास में खाया जाने वाला मखाना या कमल के बीज (Fox Nut) पोषक तत्वों का खजाना और औषधियों गुणों से पूर्ण होता है। सूखे मेवे के तौर पर उपयोग किए जाने वाला मखाना की खीर बनाकर या घी में भून कर उपवास या स्नैक्स की तरह खाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन,  कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, एंटी औक्सीडेंट, विटामिन की प्रचुर मात्रा होती है। आयुर्वेद में मखाने को बहुत ही उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। प्राचीन काल से ही भारत में लोग मखाने की खेती होती है और भोजन में उपयोग करते हैं। मखाने की खेती भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया और रूस में भी होती है।

  • कैसे बनता है मखाना?
  • मखाना से स्वास्थ्य संबंधी लाभ
  • मखाना हड्डियों की मजबूती के लिए
  • मखाना एंटीऑक्सीडेंट का खजाना
  • मधुमेह में लाभकारी
  • मोटापा कम करने में मखाने का लाभ
  • उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए फायदेमंद मखाना
  • हृदय रोग के लिए मखाना
  • प्रोटीन का पावर हाउ
  • गर्भावस्था में मखाने के फायदे
  • अनिद्रा में मखाने का लाभ
  • किडनी के लिए फायदेमंद मखाना
  • एंटी एजिंग मैं कारगर मखाना
  • पुरुषों के लिए लाभदायक मखाना
  • खून की कमी (Anemia) में लाभकारी मखाना
  • मसूढ़ों के लिए मखाना के गुण

कैसे बनता है मखाना?

कमल के बीज को मखाना कहते हैं यह बहुत ही स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से संपूर्ण होता है। मखाना जलीय उत्पाद है, कम पानी वाले तालाब ( उथले Shallow) या झील में उगाया जाता है।  जलीय उत्पाद होने की वजह से मखाने की खेती में किसी भी तरह के केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग नहीं होता, अतः यह पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक फूड होता है। ठंड के मौसम (दिसंबर-जनवरी) में मखाने के बीजों की तालाब में बुआई होती है, अप्रैल माह में इसके फूल आते हैं और जुलाई के महीने में फल आ जाते हैं।

ये फल सख्त और कांटेदार कवच में रहते है, और पानी की सतह पर तैरते (24-48 घंटे) हैं। बाद में पानी की सतह पर बैठ जाते हैं। इन सख्त कवच को गलने में डेढ़ से 2 महीने का समय लगता है। सितंबर-अक्तूबर माह से किसान पूर्ण तैयार फल को पानी की सतह से निकालना शुरू करते हैं। इसके बाद फलों को तेज धूप में सुखाकर मखाना तैयार किया जाता है

मखाना से स्वास्थ्य संबंधी लाभ (Health benefits of Fox Nut)

मखाने के सेवन उपवास के अलावा नियमित तौर पर स्नैक्स, नमकीन, खीर या व्यंजन के तौर पर, सुबह खाली पेट अंकुरित चने और बादाम के साथ भी करना बहुत ही लाभकारी होता है। इसके नियमित सेवन से कई बीमारियों से बचा जा सकता है। मखाना में कई प्रकार के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) शोध के अनुसार के मखाने में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी ट्यूमर गुण पाए जाते हैं।

“एक मुट्ठी मखाना रोजाना, रोग-बीमारी दूर भगाना”

1. मखाना हड्डियों की मजबूती के लिए (For Strong Bone)

मखाने में कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होती है। इसीलिए हर आयु वर्ग के लोगों को इसका सेवन करना चाहिए, विशेषकर बढ़ती उम्र के लोगों को दिन में दो बार मखाना खाना चाहिए। अर्थराइटिस (गठिया) के मरीज को शरीर के दर्द, हड्डी में दर्द, कमर दर्द, घुटने के दर्द से परेशानी में मखाने के सेवन से राहत मिलती है इसमें पाए जाने वाले कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देने में बेहद कारगर साबित होता है। बढ़ती उम्र के बच्चों को भी दूध और मखाना खाने से शरीर का विकास अच्छा होता है।

2. मखाना एंटीऑक्सीडेंट का खजाना

स्वस्थ,चमकदार त्वचा और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में एंटीऑक्सीडेंट की अहम भूमिका होती है। रिसर्च के अनुसार मखाने में पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होती है, इसके सेवन से शरीर में आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट्स की जरूरत पूरी होती है। मखाने में एंटीऑक्सीडेंट होने की वजह से पाचन के लिए भी लाभकारी होता है। इसे एंटी एजिंग भोजन (Anti aging food) माना गया है। इसका नियमित सेवन शरीर को रोगों से बचाता है। कोरोना काल में जहां डॉक्टर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने यह सलाह दे रहे हैं, मखाने का सेवन रामबाण उपाय होता है।

3. मधुमेह में लाभकारी (beneficial for Diabetes patient)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार भारत में 3 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं जो आने वाले समय (2030 तक) तक 8 करोड़ हो जाएंगे। डायबिटीज अन्य कई बीमारियों को जन्म देती है और शरीर को धीरे-धीरे अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। मधुमेह आंखों, किडनी, दिल (heart) और दिमाग (brain stroke) को क्षति पहुंचाता है।

मधुमेह के मरीजों लिए मखाना बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low Glycemic Index) होता है, यह रक्त में  शर्करा (Sugar) की मात्रा को नियमित रखने  में मदद करता है।  डायबिटीज के कारण होने वाले रोगों से काफी हद तक बचाता है। इसीलिए डायबिटीज के मरीजों को मखाने के सेवन की सलाह दी जाती है प्रतिदिन खाली पेट सुबह खाली पेट 5 से 10 मखाने के दाने खाने से डायबिटीज के मरीजों को बहुत फायदा होता है। मखाने में मैग्नीशियम और कैल्शियम अच्छी मात्रा में होती है और सोडियम बहुत कम मात्रा में। इसीलिए यह मधुमेह के मरीजों को मोटापे और कमजोरी से लड़ने में मदद करती है, और शरीर को मजबूती देती है।

3. मोटापा कम करने में मखाने का लाभ

वजन घटाने में मखाने के पास उपयोग है यह मोटापे की समस्या से निजात दिलाने काफी मददगार साबित होता है। एनसीबीआई के शोधनुसार मखाने मैग्नीशियम, प्रोटीन और गुड कार्बोहाइड्रेट बहुत मात्रा में होता हैं। साथ ही इसमें कैम्फेरफेरोल नामक फ्लेवोनॉइड, एंटी-एजिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के बावजूद इन पफ्ड व्हाइट बॉल्स का GI इंडेक्स हमारे नियमित भोजन जैसे रोटी और चावल से कम है। इसमें फाइबर उच्च दर्जे (high quality) का होता है, इसीलिए मखाने को वजन कम करने में सहायक माना जाता है।

4. उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए फायदेमंद मखाना (Beneficial for High blood pressure)

मधुमेह (diabetes) के अलावा ब्लड प्रेशर में भी मखाना उपयोगी होता है। शोध के अनुसार मखाने में मौजूद कुछ तत्व ब्लड प्रेशर को कम करने में प्रभावी होते हैंं। इनमें उच्च पोटेशियम और कम सोडियम होता है जो रक्तचाप के स्तर को बनाए रखने व उसे स्थिर करने में सहायक होता है।

5. गठिया (Arthritis) में लाभदायक मखाना

मखाने में कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होती है। इसीलिए हर आयु वर्ग के लोगों को इसका सेवन करना चाहिए, विशेषकर बढ़ती उम्र के लोगों को दिन में दो बार मखाना खाना चाहिए। अर्थराइटिस (गठिया) के मरीज को शरीर के दर्द, हड्डी में दर्द, कमर दर्द, घुटने के दर्द से परेशानी में मखाने के सेवन से राहत मिलती है, इसमें पाए जाने वाले कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देने में बेहद कारगर साबित होता है मखाना

6. हृदय रोग के लिए मखाना

जैसा कि हमने जानते हैं की ब्लड प्रेशर और डायबिटीज में मखाने का सेवन उपयुक्त होता है, साथ ही बढ़ते वजन और मोटापे से भी निजात दिलाने में कारगर सिद्ध है। इसीलिए भी इसे है दिल के लिए  भी उपयुक्त माना जाता है। मखाना में कार्डियोवैस्कुलर रोगों से बचाता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर में रक्त, औक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों के प्रवाह को बेहतर बनाता है। जिससे हृदयाघात जैसे बीमारी की जोखिम कम होती है। मखाने के उचित मात्रा में सेवन रक्त की आपूर्ति में सुधार करता है, जिससे हृदयाघात (Heart attack) जैसी भयंकर बीमारी से हद तक बचाव होता है।

7. प्रोटीन का पावर हाउस

मखाने में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। लगभग 100 ग्राम मखाने में 10 ग्राम प्रोटीन के आसपास की मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से शरीर में आवश्यक प्रोटीन की कमी पूरी होती है। नियमित रूप से इसके सेवन से शरीर में जरूरी प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति होती है और उसकी कमी से होने वाले की कमी से होने वाले रोगों व समस्याओं से बचा जा सकता है।

यह तत्व शरीर के पोषण के लिए बहुत जरूरी है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मांसपेशियां (Muscles) बनाने में मददगार और फिट रखने में मदद करता है। मखाना ग्लूटेन मुक्त पोषक आहार है।

8. गर्भावस्था में मखाने के फायदे

गर्भवती नारी के लिए मखाना आशीर्वाद के समान है, इसीलिए अक्सर भारतीय घरों में देखा जाता है कि गर्भवती स्त्री को गोदभराई रस्म में मेवे, फल और मिठाइयां देने के लिए रिवाज है। गर्भावस्था में महिलाएं कई तरीके से इसका सेवन अपने भोजन में , पकवानों में मिलाकर खा सकती है या भूनकर स्नैक्स की तरह सेवन मखाने का उपयोग गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है । यह प्रसव के बाद होने वाली कमजोरी को दूर करता है और गर्भस्थ शिशु की आवश्यक पोषण को प्रदान करता है इसमें इसी तरह से पोषक तत्व पाए जाते जैसे आयरन कैल्शियम, पोटैशियम, प्रोटीन इत्यादि यह मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को स्वस्थ रखने के लिए कारगर साबित होते हैं।

मखाने के सेवन से गर्भस्थ शिशु की मांसपेशियां और दिमाग का विकास अच्छा होता है फाइबर होने के कारण गर्भवती स्त्री को कब्ज की समस्या नहीं होती। प्रसव के बाद भी मखाने का नियमित सेवन जरुरी होता है।

9. अनिद्रा में मखाने का लाभ

नींद नहीं आने की समस्या आज की तनावपूर्ण और भागमभाग वाले जीवन में आम हो गई है। यह बहुत ही बड़ी समस्या है, अनिद्रा कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक बीमारियों को जन्म देती है। अनिद्रा शरीर में वात दोष को भी जन्म देती है। मखाने का इस्तेमाल पारंपरिक तरीके से (मखाने की सब्जी में प्रयोग, भून कर या खीर की तरह) करने से अनिद्रा सरीखी कई बीमारियों में लाभप्रद है।

( नोट : किसी भी मानसिक और शारीरिक बीमारी में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। घरेलू इलाज के भरोसे कभी नहीं रहे।)

10. किडनी के लिए फायदेमंद मखाना

मखाने का सेवन किडनी को स्वस्थ रखता है और किडनी की कार्य क्षमता को बढा़ता है। शोध के अनुसार खाने में एल्केलाइड, आइसोलिएन्सिन और नेफरिन जैसे तत्व पाए जाते हैं यह तत्व लीवर और किडनी को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मखाने का सेवन इसीलिए किडनी के लिए फायदेमंद होता है।

11. एंटी एजिंग मैं कारगर मखाना

त्वचा से संबंधित समस्याओं में मखाने का उपयोग सर्वविदित है। अनुसंधान के अनुसार मखाना एंटी ऑक्सीडेंट गुण से पूर्ण होता है इसलिए यह त्वचा संबंधी रोगों की समस्याओं को दूर करने में प्रभावशाली होती है, साथ ही झुर्रियों को कम करने में सहायक होता है। इसके सेवन से त्वचा में चमक और स्निग्धता आती है। मखाने में मौजूद एंजाइम ( L-isoaspartyl methyl transferase) प्रोटीन कोशिकाओं का निर्माण करते हैं और इसी वजह से बुढ़ापे के लक्षण को दूर करते हैं।

12. पुरुषों के लिए लाभदायक मखाना

मखाना शारीरिक शक्ति को बढ़ाता है और यह वीर्यवर्धक भी होता है आयुर्वेद के अनुसार अगर इसके बीज को दूध में उबालकर सेवन करें वीर्य की मात्रा वृद्धि होती है। इसके बीज के सेवन से कामेच्छा और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है।

13. खून की कमी (Anemia) में लाभकारी मखाना
हीमोग्लोबिन या आयरन की कमी से अक्सर थकान, डिप्रेशन और कमजोर याददाश्त के लक्षण दिखाई देते हैं, यह खून की कमी का शुरुआती लक्षण है। मखाने में पर्याप्त मात्रा में आयरन होती है। मखाना आयरन से भरपूर होता है, जो रक्त में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है।मखाने के सेवन से शरीर में खून की कमी संबंधी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

14. मसूढ़ों के लिए मखाना के गुण (Makhana Beneficial for Gum in Hindi)

पोषक तत्वों की कमी और बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होने वाले मसूड़ों में दर्द या मसूड़ों से खून आने की बीमारी (पायरिया) में मखाने का सेवन बेहद कारगर साबित होता है मखाने में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम,आयरन, विटामिन ए मसूड़े को मजबूती प्रदान करते हैं और मसूडों को स्वस्थ बनाते हैं।

यह  स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी है। प्रतिदिन कम से कम एक मुट्ठी मखाना हर आयु वर्ग के लोगों को खाना चाहिए अगर हर दिन मुमकिन ना हो तो सप्ताह में दो तीन बार इसका सेवन अवश्य करें, मखाने की तासीर ठंडी होती है, पर इसे हर मौसम में खाया जाता है।


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