Dharm-Sanskriti/फूलैरा दूज क्यों मनाते हैंं?

फूलैरा दूज अथवा ‘फूलैरा दौज’ (फूलों की होली Phulera Dooj) हिन्दू धर्म के मुख्य त्योहारों में से है। फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फूलैरा दूज मनायी जाती है, जो बसंत पंचमी और होली बीच मनायी जाती है। यह उत्सव होली के आगमन का प्रतीक है। इस उत्सव को मनाने के पश्चात उत्तर भारतीय ग्रामीण होली की जोर-शोर से तैयारी में लग जाते हैं।

फूलैरा दूज पूरी तरह दोषमुक्त दिन है अर्थात अबूझ मुहूर्त, इस दिन का हर क्षण शुभ होता है। इसलिए कोई भी शुभ काम करने से पहले मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं होती। फूलैरा दूज फाल्गुन माह का सबसे शुभ दिन होता है,  इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना सोचे किया जाता है।

इस दिन फूलों से रंगोली बनाया और श्री कृष्ण और राधाजी का फूलों से श्रृंगार करके पूजन का प्रावधान है। मथुरा, वृंदावन और ब्रज में इस त्यौहार पर फूलों से मंदिर को सजाया जाता है और फूलों से होली खेली जाती है। भजन कीर्तन कर भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न किया जाता है।

फूलैरा दूज और वैवाहिक जीवन

  1. बसंत ऋतु के इस त्योहार का वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को मधुर बनाने के लिए इसे मनाया जाता है। वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर करने के लिए भी इस दिन दंपती या प्रेमी युगल श्री कृष्ण भगवान और राधा जी की पूजा की जाती है।
  2.  ‘अबूझ मुहूर्त’ होने के कारण इस दिन कोई भी शुभ कार्य  पूरे दिन कर सकते हैं। इस दिन में साक्षात श्रीकृष्ण का आशीर्वाद होता है तो जो श्रद्धालु प्रेम और भक्ति से राधा-कृष्ण की अराधना करते हैं, भगवान श्रीकृष्ण उनके जीवन में प्रेम,सुख, शांति और संपन्नता बरसाते हैं।
  3. जिस लड़के या लड़की के कुंडली में प्रेम का अभाव हो, उन्हें इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से लाभ होगा।
  4. नए काम शुरू करने के लिए भी  फुलैरा दूज का दिन सर्वोत्तम होता है।

फूलैरा दूज की पूजन विधि

  1. सुबह या शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर श्रृंगार करें।
  2. फूल, गुलाल और आटे की रंगोली बनाए।
  3. श्री कृष्ण-राधाजी का सुगंधित पुष्पों से श्रृंगार करें और मिश्री, मिष्ठान, पंचामृत, गुलाल,धूप, गंधादि से पूजन करें।
  4. राधे-कृष्ण को गुलाल जरूर लगाएं।
  5. यथासंभव राधे-कृष्णा का जप करें या  ‘मधुराष्टक’  का पाठ करें।
  6. भक्ति भाव से भजन -कीर्तन करें और प्रेम सद्भावना का प्रसार करे

क्या है गुलरियां?

गुलरियां गाय के गोबर को गोल आकर देकर उसके बीच में सुराख बनाकर बनती है। सूखने के बाद गुलरियां को पतली रस्सी या धागे में पिरो कर गुलरियों की माला ( 5,7 ,या 11) बनाई जाती है। यह सिर्फ फूलैरा दूज से बनाना शुरू कर सकते हैं। इन गुलरियों को होलिका दहन में जलाया जाता है।

इस दिन क्या करें  और क्या नहीं करें

  1. फूलैरा दूज के दिन श्री कृष्ण- राधा जी का पूजन अवश्य करें और सुगंधित रंग-बिरंगे फूल और गुलाल चढ़ाएं।
  2. अविवाहित कन्या या सुहागिन महिलाऐं राधा जी को श्रृंगार का सामान अर्पित कर कोई एक सामान अपने पास रखना चाहिए। मान्यता है ऐसा करने से जिस कन्या के विवाह में बाधा आ रही हो, उनका विवाह शीघ्र हो जाता है।
  3. इस दिन सात्विक भोजन करें । मांसाहार, मद्य पान,तंबाकू का सेवन भूल से भी ना करें।

(नोट: मांसाहार, मद्य पान,तंबाकू का सेवन सर्वथा हानिकारक है। इसका सेवन नहीं करें।)

  • इस दिन गाय के पूजन और गाय आहार देने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे कर सकते हैं।
  • इस दिन गाय, घर के बड़े-बुजुर्गों, कृष्ण भक्तों, प्रेमी युगलों को समुचित सम्मान दें। ऐसा करने से घर में खुशहाली, संपन्नता और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • कहते हैं इस दिन जितना प्रेम और भक्ति श्री कृष्ण भक्त अपने आराध्य से करते हैं, उतना ही प्रेम प्रभु अपने भक्तों पर बरसाते हैं।

फूल, गुलाल-रंगों और प्रेम का यह अनूठा त्योहार भक्ति और संस्कृति का संगम है। भजन, कीर्तन, भक्ति भाव से इसे सपरिवार मनाए और होली के आगमन की तैयारियां करें।

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