कैसे है देसी घी सेहत का खजाना ?

भारत में घी का रसोई से लेकर धार्मिक अनुष्ठान और आयुर्वेदिक उपचार में महत्वपूर्ण स्थान है। घी भोजन के स्वाद (taste) बढ़ाने के साथ ही स्वास्थ्य (health) दृष्टि से भी उत्तम होता है। प्रतिदिन सही मात्रा ( amount) में घी का सेवन (consumption) शरीर के लिए अमृत के समान होता है और अप्रत्याशित लाभ देता है। महर्षि चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट सदृश महान विद्वान आयुर्वेदेचार्य घी की गुणों का बखान करते हैं, घी को सभी स्निग्ध पदार्थों में श्रेष्ठ मानते हैं। सुश्रुत इसे विषनाशक मानते हैं। वाग्भट्ट इसको संतान-दाता चिर-यौवन दिलाने वाला मानते हैं।  

” घृत औषध से भरी, दे शक्ति अपार। कान्ति वीर्य शक्तिदायी, रखे स्वस्थ परिवार।

देशी घी पोषण का सर्वो्त्तम स्रोत

घी में मौजूद कुछ अच्छी वसा (good fats) स्वास्थ्य के नजरिए से हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होती है। हर दिन एक चम्मच घी खाने से कई रोग के बचा जा सकता है। गाय की देशी घी को सर्वोत्तम (best) माना गया है। घी में मौजूद पोषक तत्व इसे महत्वपूर्ण बनाता है।

घी की तासीर गर्म होती है। जैसे जलती आग पर घी डालने से आग भड़कती है, वैसे ही भोजन के साथ जब घी पेट में जाता है तो पाचनशक्ति (digestive power) बढा़ता है। जिनकी पाचनशक्ति कमजोर होती है, उनके लिए घी हानिकारक है। ऐसे लोगों को व्यायाम (exercise) और खाने में सुधार कर पाचनतंत्र (digestive system) को दुरुस्त करके घी को खाना फायदेमंद होगा।

आमतौर पर यह धारणा बन गई है कि घी खाने से मोटापा बहुत तेजी से बढ़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि घी में कैलरी होता है, यह दिल और दिमाग को ताकत देता है। इसके अलावा इसमें विटामिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल और पोटैशियम जैसे भी कई पोषक तत्व होते हैं. ये पोषक तत्व शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। शारीरिक रूप से दुर्बल लोगों को घी वरदान है।

देसी घी शरीर के रक्त संचार को नियमित रखता है, जिससे शरीर स्फृर्तिवान रहता है और त्वचा में कांति आती है। इससे आंखों की रोशनी भी तेज होती है। देसी घी खाने का सही तरीका शरीर को स्वस्थ्य और बलवान बनाता है। जो लोग शारीरिक मेहनत अधिक करते हैं, उनके लिए घी का सेवन बहुत लाभकारी है।

कैसे बनाए घर पर घी ?

10-12 दिन की मलाई को इकट्ठा करें। मलाई में ठंडी पानी मिलाकर इसे ब्लेंडर में डालकर 5 मिनट तक ब्लेंड करे या मथनी से मथे। मथने (blend) के बाद मक्खन और छाछ अलग हो जाएगी। इसे अलग-अलग बर्तन में निकाल लें। मक्खन को पैन में डालकर पकाएं। धीमी आंच पर को गर्म करें, मक्खन धीरे-धीरे पिघलने लगती है। थोड़ी ही देर में इसमें से ऊपर की तरफ घी तैरने लगेगा और नीचे कुछ अवशेष पैन में नीचे रह जाएगा।

भारतीय ग्रामीण पद्धति में दूध को मिट्टी के बर्तन में मंद-मंद आंच पर गर्म किया जाता है, जिससे दूध पर मलाई की अपेक्षाकृत मोटी परत पड़ती है और अधिक मात्रा में मलाई के एकत्रित करके, फिर इस दूध को जमाकर जब दही बनाया जाता है तो यह गाढ़ा वसा अम्ल लौनी के साथ बंधा रह जाता है। दही की मलाई से प्राचीन ग्रामीण पद्धति द्वारा तैयार किया गया घी सबसे उत्तम किस्म का होता है। इसे लौनी घी भी कहते हैं।

घी संरक्षित करने का तरीका ( How To Preserve Ghee for Long Time)

घी को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ विशेष करने जरूरत नहीं है। इसे एक मर्तबान (jar) में भरकर ठंडे जगह पर रखें। ठंडे स्थान पर रखा हुआ घी 3-4 महीने तक खराब नहीं होता है। इसे रेफ्रिजरेटर मेंं रखा हुआ घी एक साल तक सुरक्षित रहता है। इसे सामान्य तापमान पर भी रखा जा सकता है।

पोषण एवं सेहत का खजाना, एक चम्मच घी रोजाना खाना

घी के उपयोग (Uses of Ghee)

भारतीय घरों में घी का उपयोग रोजाना के दिनचर्या में शामिल है। सीमित मात्रा में इसका सेवन लाभकारी है। घी के कुछ खास उपयोग निम्नलिखित है

  • उत्तर भारतीय रसोई मेंं फुल्के, पराठों, चीला को स्वादिष्ट बनाने के लिए उस पर घी का उपयोग होता है। वहींं दक्षिण भारतीय घी का उपयोग डोसा, इडली, अप्पे, उत्तपम बनाने के लिए करते हैंं।
  • त्योहारों पर पकवान और मिष्ठान बनाने या तलने के लिए घी कर सकते हैं।
  • अदरक, दालचीनी के चाय में घी मिलाकर पीने से खांसी और गले की समस्याओं में फायदा मिल सकता है।
  • आयुर्वेदिक कुछ दवाओंं और जड़ी-बूटियों को भी घी के साथ मिलाकर खाने का निर्देश होता है।
  • घी वातावरण को पवित्र रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसीलिए पूजा, यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान घी के बिना सम्पन्न नहीं हो सकते।
  • मान्यता है गाय के 10 ग्राम घी से यज्ञ-हवन करने वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन होता हैं। आग में देशी गाय के घी की आहुति देने से उसका धुएं से वातावरण प्रदूषण और विकिरणों से मुक्त हो जाता है।
  • गाय की घी मनुष्य में शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों (Radiation) का दुष्प्रभाव को कम करने क्षमता होती है।

घी खाने के फायदे

घी खाने के अनगिनत फायदे हैं। घी के सेवन से शरीर में सात धातुओं रस, रक्त, मांस, मेरु, अस्थि, मज्जा और वीर्य में वृद्धि होती है। जिससे बुद्धि और शक्ति बढ़ती है।

1.गाय के दूध में घी डालकर पीने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। साथ ही, पेट की कब्ज और एसिडिटी की समस्या भी इसके सेवन से दूर होती है। कमजोर पाचन शक्ति होने का मतलब है कई तरह की बीमारियों को न्यौता देना। जब पाचन शक्ति कमजोर होती है, तो कुछ भी गलत खाने से तुरंत हाजमा बिगड़ सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, घी का सेवन से पाचन शक्ति मजबूत होती है। हालांकि हमेशा घी का सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।

2. गाय की शुद्ध घी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन E होते हैं। इसे खाने और लगाने से त्वचा (skin) में नमी बनी रहती, जिससे त्वचा स्वस्थ, मुलायम और चमकदार (glow) होती है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक चम्मच देशी घी खाने से शरीर निरोगी रहता है।

3. फटे होंठों को ठीक करने से लेकर चेहरे पर निखार लाने के लिए घी का इस्तेमाल किया जाता है। घी त्वचा का सूखापन (skin dryness), त्वचा में सूजन व संक्रमण के कारण लाली (Erythema), व खुजली की शिकायत को दूर करने में मदद करता है। त्वचा को स्वस्थ और जवां बनाता है।

4. देशी घी में मिश्री मिलाकर हर दिन सेवन करने से आँखों की रोशिनी तेज होती है। साथ ही 1 चम्मच घी में 1/4 काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट व रात को सोते समय खाने से आंखों से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं।

5. गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए घी अति फायदेमंद है। दूध में घी मिलाने से इसकी पौष्टिकता बढ़ जाता है। अक्सर गर्भवती महिलाओं मेंं विटामिन डी और कैल्शियम की कमी हो जाती है। घी के सेवन से यह समस्या दूर होती है।

6. गर्भवती स्त्री अगर घी सिंघाड़ा पाउडर 1 tbsp और गुनगुने दूध के साथ सेवन करे तो गर्भनाल (placenta) की अवस्था ठीक रहती है। चावल और दही के साथ घी का सेवन भ्रूण (Embryo) के दिल (heart) के लिए फायदेमंद होता है। छठे महीने में चावल के साथ गाय का घी भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए उपयोगी हाे सकता है। किसी भी तरीके से गर्भवती (pregnant) महिलाओं को घी को खाने में शामिल करना जरूरी है।

7. कमजोरी और थकान की समस्या हो, तो इस थकान का इलाज दूध में घी मिलाकर इसके सेवन से किया जा सकता है। इससे थकान दूर होने के साथ, बल्कि शरीर का स्टैमिना भी बढ़ता है, इसलिए रोज दूध में गाय का घी डालकर इसका सेवन करना चाहिए। इसके अलावा रात में सोने से पूर्व गुनगुने दूध में एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीने से शरीर को भरपूर पोषण मिलेगा, जिससे शरीर में एनर्जी का संचार होगा और कमजोरी भी दूर हो जाएगी।

8. घी के सेवन से शरीर की ताकत बढ़ती है। इसलिए कमजोर लोगों को घी खाने की सलाह दी जाती है। जो लोग बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं या जिम जाते हैं उन्हें भी घी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

8. देसी घी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर का वजन नियंत्रित करने मे मदद करता है। ये चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) को भी सक्रिय करता है। इससे अतिरिक्त चर्बी कम होती है। देसी घी शरीर में जमे चर्बी (fat) को गलाकर विटामिन में बदलने का काम करता है।

9. देसी घी शरीर में जमी चर्बी को गला (burn) कर, इसे विटामिन में बदलतती है। इस प्रक्रिया के दौरान आपका खाना जल्दी पच जाता है और शरीर की चयापचय (metabolism) अच्छी होती है। घी का सेवन करने से कब्ज और पेट संबंधी समस्या ठीक होती है। घी शरीर में ऊर्जा स्तर (energy level) को सुचारू रखता है। खिलाड़ीयों को घी को अपने खानपान में जरूर शामिल करना चाहिए।

9. बालों में घी का मसाज करने से बाल जल्द सफेद नहीं होते हैं। जिन लोगों के बाद झड़ते हैं या पतले हो चुके हैं , उन्‍हें नियमित रोज सुबह खाली पेट घी का सेवन करना चाहिए। इससे बाल हेल्‍दी तो बनते ही हैं साथ में मुलायम और चमकदार भी होते हैं। 

10. शिशुओं के आहार में घी ज़रूर शामिल करें इससे उनका मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का विकास ठीक ढंग से होता है। मेडिकल रिसर्च में भी पाया गया है कि, घी खाने से दिमागी और शारीरिक विकास होता है।

11. यह आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम पहुंचाता है। यह एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है। इसमें फ्री रेडिकल्स तत्व भी होते हैं। इसकेे उपयोग से शरीर मेें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, समय से पहले उम्र बढ़ने से रोकता है और यह अल्जाइमर रोग से बचाता है।

12. देशी घी में लिनोलिक एसिड (linoleic acid) पाया जाता है। यह शरीर के वजन को बढ़ने से रोकता है। रक्त के शुद्धिकरण (purification) की प्रक्रिया में भी घी की अहम भूमिका होती है। यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को शांत रखता है।

13. अदरक, काली मिर्च, गुड़ या मिश्री को दो चम्मच देशी घी में पकाकर सेवन करने से गले की खराश और खाँसी की समस्या से राहत मिलती है। काली खांसी और सूखी खांसी में भी घी का सेवन फायदेमंद होता है।

14. शरीर में वात (gas) के असंतुलन से अनेक प्रकार के रोग होते हैं। घी के सेवन से गैस के प्रभाव को कम करता है और इससे होने वाले रोगों से बचाव होता है।

15. विटामिन-K कमी के कारण शरीर में कई गंभीर रोग हो सकते हैंं, मसलन पाचनतंत्र में गड़बड़ी, डायरिया होना, किडनी संबंधित बीमारी होना। भैंस के दूध से बने घी में विटामिन-के की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।

16. मिर्गी और पागलपन की बीमारी में 5-10 साल पुराना 10 ग्राम घी का सेवन आयुर्वेद के अनुसार लाभकारी होता है।

17.  शरीर से साँप काटने पर आधा पाव (125 gm) घी, 4 भाग बांटकर 4 बार दूध में मिलाकर पिलाने से जहर निकल जाता है, (ऐसी आयुर्वेदिक मान्यता है)।

18. प्लेग होने पर 20-25 ग्राम देशी घी को दिन में चार बार एक कप दूध के साथ पिलाने से प्लेग रोग में राहत होती है।

19. घी रक्त शुद्ध करता है और काफी हद तक बुढ़ापे को दूर करता है। घी जितना ताजा होता है, उतना ही लाभदायक होता है। एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी घी मिलाकर सोने से पूर्व पीने से कब्ज की समस्या का अंत हो जाता है।

21. जलने पर तुरंत घी लगाने से राहत मिलती है। सुश्रुत संहितानुसार घी व शहद घाव भरने, सूजन को कम करने और शरीर पर घाव, चोट या खरोंच के निशान को दूर करने के लिए किया जा सकता है। शहद के साथ घी का उपयोग लेप के रूप में प्रभावित क्षेत्र पर लगाने के लिए कर सकते हैं। इस मिश्रण का केवल लेपन होता है, इसके का सेवन हानिकारक होता है।

22. घी में घाव को भरने का विशेष गुण है। यही कारण है कि सभी प्रकार के मरहमों की अपेक्षा पुराना घी अधिक गुणकारी माना गया है। कई वर्षों के पुराने गाय के दूध से बना घी स्वयं में एक उत्तम मरहम है।

22. गाय के घी का दीया सुबह-शाम नियमित रूप से जलाने पर आस-पास के वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और वातावरण पवित्र हो जाता है। इसलिए पूजा, यज्ञ और हवन में गाय का घी इस्तेमाल किया जाता है।

घी खाने में बरतने वाली सावधानियां

घी, जल में अघुलनशील और कार्बनिक घोलकों में घुलनशील होता है। यही कारण है कि घी देर से पचता है। इसीलिए, भोजन में घी की कम मात्रा में लेना चाहिए। 

मोटे लोगों को घी का सेवन भी कम मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में इसके सेवन से मोटापे में वृद्धि होती है। 

घी जितना गुणकारी है, न पचने पर उतना ही हानिकारक भी। इसलिए घी उतनी ही मात्रा में खाना चाहिए, जितना कि आसानी से पच जाए। 

वृद्धों, बालकों और कम शारीरिक मेहनत करने वालों को घी अधिक मात्रा में नहीं पचता है। ऐसे लोगों को घी कम मात्रा में खाना चाहिए। वृद्धों को दिन में 10 gm से ज्यादा घी का सेवन वर्जित होता है।

वेजिटेबल घी में ताकत कम होती है और यह गले को खराब करता है। इसे खाने से बचे।

(अस्वीकरण : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यहाँ उपलब्ध जानकारी किसी दवा या चिकित्सा का विकल्प कतई नहीं है। ज्यादा जानकारी के लिए अपने न्यूट्रिशनिष्ट या डॉक्टर से संपर्क करेंं।)

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