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ऋषि पंचमी का महत्व, व्रत विधि और कथा

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ‘ऋषि पंचमी’ कहलाती है। और इस दिन किये जाने वाले व्रत को ऋषि पंचमी-व्रत कहते हैं। इस व्रत में सभी ऋषियों सहित माता अरूंधति का भी पूजन होता है। समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों के शमन हेतु स्त्री-पुरुष इस व्रत को करते हैं।More

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हरितालिका तीज कथा, विधि, महत्व और दान

भाद्र मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भारत वर्ष में सुहागिन स्त्रियाँ हरितालिका व्रत करते हैं। सुहागिन स्त्रियां हरतालिका तीज का व्रत अखण्ड़ सौभाग्य और सुखमय वैवाहिक जीवन की प्राप्ति हेतु करती हैं।More

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अजा एकादशी परिचय, कथा, पूजन विधि, महत्व और फल

भारत त्योहारों और उत्सवों का देश है। उत्सव के अवसर पर व्रत करने की प्रथा भी प्रचलित है। अक्सर लोग पूछा करते हैं- “ यदि त्योहार समाज को संगठित करने और खुशीयां मनाने के लिए होते हैं, तो उसमें भूखे रहने की क्या औचित्य है?” More

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रक्षा बंधन की धार्मिक व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पूजन विधि

इस दिन बहनें ईश्वर से अपने भाई की कलाई में मंगल कामना (दीर्घायु, सुख-समृद्धि आदि) करते हुए राखी या रक्षा सूत्र बांधती है। भाई अपनी रक्षा सूत्र बांधने पर बहनों वचन देतें हैं की, वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करेंगे, हर विपत्ति-बाधा से बहन की रक्षा करेंगेMore

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कामिका एकादशी कथा, पूजन विधि और पूजा-व्रत फल

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। ब्रह्मांड पुराण वर्णित कथानुसार राजा हरिश्चन्द्र बड़े ही महान, सत्यनिष्ठ और दृढ़व्रती थे। राजा हरिश्चंद्र को अपने जीवनकाल में अपनी सत्यनिष्ठता के कारण अनेक प्रकार कष्ट उठाने पड़े। More

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हूल क्रांति दिवस/ जाने आजादी की पहली लड़ाई की कहानी

“करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो” का नारा देकर 30 जून, 1855 को सिद्धू और कान्हू दो वीर भाईयों के नेतृत्व में झारखंडवासियों  ने अंग्रेजी हूकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।More

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कैसे पाए करिश्माई सौंदर्य मुल्तानी मिट्टी के फेसपैक से?/ दमकती त्वचा और मुल्तानी मिट्टी के 10 फेसपैक (How fuller’ earth enhance glow of skin charismatically?)

सौंदर्य और प्राकृतिक पदार्थ का अनुपम रिश्ता सदीयों से चला आ रहा है। हम जितना प्रकृति के करीब जाते हैं, प्रकृति उतना ही नैसर्गिक सौंदर्य का पान हमें कराती है। मुल्तानी मिट्टी प्रकृति का ऐसा ही एक वरदान है जो हमारे त्वचा (skin) और बालों को ना सिर्फ सौंदर्य प्रदान करता है, बल्कि इससे संबंधित समस्या से लड़ने में मदद भी करता है।More

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75 बिजनेस आइडिया जो कम पूंजी में अधिक मुनाफा दे /75 best low investment business Idea (Part 1)

अपना बिजनेस करना हर युवा का सपना होता है। कोरोना काल में महामारी और लौक डाउन के कारण उत्पन्न स्थिति से तो अपना रोजगार करना युवाओं की जरूरत बन गई है। जानकारी की कमी और आर्थिक स्थिति भी कई बार युवाओं के बिजनेस करने के रास्ते में अवरोध करता है। पर कहते हैं ना, कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।More

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अदरक के फायदे/ कैसे बनाएं अदरक का तेल/ अदरक का हलवा/ अदरक का पाचक चूर्ण

अदरक की तासीर गर्म होती है, अतः सर्दियों में इसका सेवन बढ़ जाता है। किंतु कोरोना काल में इसके औषधीय गुणों के कारण पूरे साल अदरक के सेवन और मांग बनी रही। अदरक कफ-पित्त-वात नाशक होता है। More

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क्यों नींबू है उपयोगी निरोगी और रोगी सभी के लिए? / कोरोना काल में क्यों बढ़ गई नींबू की मांग?

12 महीने मिलने वाला यह फल स्वाद में खट्टा होता और साइट्रस  (citrus) फल है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। नींबू में स्वाद और गुण असीमित हैं। इसका उपयोग पेय, अचार या सब्जियों में स्वाद बढ़ाने के लिए होता है।More

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श्री कृष्ण भगवान की बहन और यदुवंशियों की कुलदेवी कैलादेवी के चमत्कारी मंदिर का रहस्य

यदुवंशियों (हिन्दू) की कुलदेवी माता कैलादेवी का विश्व प्रसिद्ध चमत्कारी मंदिर राजस्थान के करौली जिले से करीब 24 किमी दूर, त्रिकूट पर्वत पर, कैला ग्राम में है। इसकी शक्तिपीठ की ख्याति भारतवर्ष में सर्वत्र है। कैला देवी मंदिर देवी भक्तों के लिए अति पूजनीय स्थल है। मां कैलादेवी आदिशक्ति महायोगिनी महामाया की अवतार हैं, जिनका जन्म गोकुल में नंदराय जी और यशोदा मैया के घर हुआ था।More

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क्यों मनाते हैं शीतलाष्टमी अष्टमी? क्या महत्व है शीतलाष्टमी का?

प्राचीन काल से हिन्दू धर्मावलंबी परम पूज्य देवी शीतला माता की आराधना करते आ रहे हैं। पुराणों में भी माता के महात्म्य का उल्लेख है। शीतला माता हाथों में कलश, सूप, मार्जनMore

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Dharm-Sanskriti/फूलैरा दूज क्यों मनाते हैंं?

फूलैरा दूज अथवा ‘फूलैरा दौज’ (फूलों की होली Phulera Dooj) हिन्दू धर्म के मुख्य त्योहारों में से है। फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फूलैरा दूज मनायी जाती है, जो बसंत पंचमी और होली बीच मनायी जाती है। More

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षट्तिला एकादशी

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी (Shattila Ekadashi) कहते हैं। पद्म और विष्णु पुराण के अनुसार माघ मास के एकादशी और द्वादशी को श्री हरी विष्णु जी का तिल से पूजा और व्रत का बहुत महत्व है।More

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किसान नेता चौधरी राकेश सिंह टिकैत

किसान नेता राकेश टिकैत आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे उन किसान नेताओं में शुमार रखते हैं, जो किसानो के व्यवहारिक हित की बात रखते हैं और किसान हित के लिए खड़े भी होते हैं। More

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कैसे पाये 100 साल तक चुस्त और स्वस्थ्य काया

कैसे पाये लम्बे समय तक चुस्त और स्वस्थ्य काया हमारे जीवन में खाने का बहुत महत्व है ये तो सभी जानते है। लजीज खाने हर दिल को अजीज होते हैं। हमारे दैनिक जीवन के खानपान और दिनचर्या ( daily routine) ही हमारे शरीर को भविष्य (future) के लिए तैयार करते है। स्वस्थ्य और निरोगी शरीर…More

भारत के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी महावीर अझगूमुत्थु कोणे यादव की अमर कहानी (Maveeran Alagumuthu Kone Yadav)

महान सेनानायक और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी महावीरन श्री अझगू मुत्थू कोणे यादव का जन्म 11 जुलाई, 1710 ई. में तमिलनाडु के, कोट्टालंकुलम गांव, कोविलपट्टी के टूटीकोरिन जिले में हुआ था। अझगू मुत्थु कोणार यादव को सर्वइकरार के नाम से भी जाना जाता है।More